Home About Us Membership E-Magazine Addvertise Feedback Contact
   
Home

सूरजकुंड हस्तशिल्प मेले में लुभा रहे हैं राजस्थानी व्यंजन


राजस्थान की दाल-बाटी-चूरमा और गट्‌टे की सब्जी का नाम आने पर मुंह में पानी न आए, यह संभव नहीं । सूरजकुंड मेले में राजस्थान का यह पारंपरिक भोजन अपने असली स्वाद में लोगों को मिल रहा है । दर्शकों की भीड़ अगर किसी फूड कोर्ट में नजर आ रही है तो वह राजस्थान के फूड स्टॉल पर । आपको राजस्थान की स्पेशल थाली खानी हो या फिर मिनी थाली या अन्य कोई व्यंजन सभी कुछ यहां पर उपलब्ध है । सूरजकुंड हस्तशिल्प मेले में राजस्थान थीम स्टेट हो और राजस्थान के व्यंजनों की बात न हो, यह संभव नहीं । इससे पूर्व आयोजित हुए मेलों में भी राजस्थान के व्यंजन हमेशा ही दर्शकों को लुभाते हैं । ऐसे में जब थीम स्टेट ही राजस्थान हो और राजस्थान टूरिज्म अपने विशेष व्यंजनों के साथ मेले के फूड कोर्ट में मौजूद हो, तो फिर कहना ही क्या लोगों को सर्वाधिक लुभा रही है राजस्थानी थाली 20 रूपये में उपलब्ध इस थाली में मिक्स दाल, चार बाटी, जिनमें तीन सादा और मसाला बाटी चूरमा, गटटे की सब्जी और राजस्थान की तली हुई मिर्च शामिल हैं । यदि आपको कम भूख है तो ही कोई दिक्‍कत नहीं, 10 रूपये में आप ले सकते हैं राजस्थानी मिनी थाली । इसमें कढ़ी-पकौड़ा, चावल, दो चपाती और राजस्थान की तली मिर्च का जायका आपको मिलेगा । यदि आपको कुछ हल्का-फुल्का खाने का मन कर रहा है तो जोधपुरी व्यंजन शेखावटी, दहीभल्ला १५ रूपये में आपका मुंह चटपटा करने को तैयार है ।

इसके साथ ही यदि आपका मन तीखे खाने को कर रहा है तो 20 रूपये में अजमेर का व्यंजन कढ़ाई-कचौड़ी, मिर्च वड़ा और प्याज कचौड़ी दो चटनियों के साथ उपलब्ध हैं । तीखा खाकर यदि आपको मुंह में जलन हो रही है तो मीठे का भी यहां पर इंतजाम है । रूपये में राजस्थान का परंपरागत मूंग की दाल का हलवा और जोधपुरी मावा कचौड़ी आपका जायका बदल देगी । राजस्थान फूड स्टॉल प्रभारी राजस्थान पर्यटन के अधिकारी करण सिंह ने बताया कि पहले ही दिन से जो भीड़ यहां है, वह उनकी उम्मीद से काफी है । उन्होंने कहा कि राजस्थानी व्यंजनों का अपना एक अलग आनंद है । ऐसे में जब राजस्थान पर्यटन विभाग इसको परोस रहा है तो इसके स्वाद का अनुमान आप खुद लगा सकते हैं ।

इस बात को कुछ और स्पष्ट करने के लिए आप पिछले दोनों ‘मुझसे शादी करोगी’ को ले सकते हैं, जिसमें अमरीश पुरी अपने पालतू कुत्ते को अपने बेटे जितना अजीज मानते हैं और उस कुत्ते के खो जाने पर खाना-पीना सब छोड़ देते हैं । यहाँ तक कि वो अपनी बेटी प्रियंका चोपड़ा को भी अपने कुत्ते ‘टॉमी’ से ज्यादा प्यार नहीं करते । यह विकार पहले तो बड़े-बड़े घरों तक सीमित था क्योंकि वहाँ एकाकीपन और तन्हाई ज्यादा भी लेबिन अब इस विकार ने मध्यम और निचले तबकों में भी अपने पांव पसारने शुरू कर दिये हैं । जरूरत है जल्द से जल्द इस प्रकार के लगाव से दूर होने कि वरना इस तरह का लगाव हमारे मन-मतिष्क के लिए अच्छा नहीं कहा जा सकता । इससे बचने के लिए हमें अपनों में वह प्यार ढूंढ़ना चाहिए जो हम अपने पालतू जानवरों में ढूंढते रहते हैं ।