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संपादकीय

- पं० कृष्णगोपाल मिश्र
जिस प्रकार से शिक्षा मानव जीवन को सुधारने संवारने व उसे सामाजिक सुंदर आनंद देने में सहायक होता है उसी प्रकार से समाज में त्यौहारों का भी बड़ा महत्वपूर्ण स्थान होता है कि समाज में लोगों को आपस में जोड़ने, प्यार बढ़ाने, संस्कृति के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका होती है । भारत में होली हिंदुओं का सबसे बड़ा त्यौहार होता है, और चूंकि हिंदुस्तान एक गंगा-जमुनी तहजीब का परिचायक देश है तो यहाँ सभी धर्मों के लोग बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते हैं लेकिन दुर्भाग्य वश हर साल होली हमारे देश के भविष्य नन्हे नौनिहालों के बोर्ड परीक्षा के समय में होना बड़ा ही उनके कैरियर पर दुष्प्रभावी होता है । क्योंकि बहुत से ऐसे बच्चे जो अपने मन को अपने नियंत्रण में नहीं रख पाते हैं वे होली और परीक्षा दोनों की कश्‍मकश में किसी भी चीज पर केंन्द्रित नहीं रह पाते और बच्चों के परीक्षा पर इनका दुष्प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है । साथ ही साथ यह परीक्षा उस समय ही पड़ती है जब अधिकांश नौकरी पेशा लोग मार्च क्लोजिंग के कारण काफी व्यस्तता से गुजर रहे होते हैं ऐसे में वो अपने बच्चों को भावनात्मक सहयोग देने में असफल हो जाते हैं, तथा ऐसी स्थिति में अभिभावक भी होली और नौकरी के तनाव के कारण बच्चों को सहयोग नहीं कर पाते हैं और उनके लिए भी यह समय अनुकूल नहीं कहा जा सकता । साथ ही यह परीक्षा ऐसी होती है, जहाँ से बच्चे अपने जीवन में लक्ष्य को नई दिशा देते हैं, इसलिए यह पूरे जीवन के कैरियर के लिए यह बड़ा ही निर्णायक समय होता है । और इसमें जरा सी भी चूक होने पर यह बच्चों को हताशा-निराशा व हीनता से भर देती है जिससे बच्चे कभी-कभी आत्महत्या, घर से भाग जाना या अन्य गलत निर्णय के तरफ भी भाग जाते हैं । ऐसी स्थिति में बोर्ड परीक्षा करवाने वाली संस्थाओं को इस समय पर विशेष ध्यान रखना चाहिए कि पूरे वर्ष में बोर्ड परीक्षा का सर्वाधिक उपयुक्‍त समय क्या हो? साथ ही गार्जियन को भी इस जीवन की आपा-धापी में जीवन के व्यस्त समय में भी अपने नौनिहालों के साथ सरलता, दोस्ताना व्यवहार करते हुए उनकी हर समस्या को जानें और प्रोत्साहन दें और सरलतापूर्वक उन्हें अपने लक्ष्यों में आगे बढ़ने दें । अगर बच्चे असफल भी होते हैं तो उस पर अफसोस करने से बढ़िया है कि उन्हें अगली सफलता के लिए प्रोत्साहित करें ।

बच्चों को भी इस बात पर जरूर ध्यान देना चाहिए कि परीक्षा हमारे समाज का अभिन्‍न अंग जरूर है, हम इसमें सफल होकर के अपनी ज्ञानता का परिणाम जरूर साबित करते हैं लेकिन ये परीक्षाएं एक व्यवस्थित सिलेबस पर आधारित होती हैं जो ये तय करती हैं, कि हम उस सिलेबस में परिपक्व हो गये और उस सिलेबस की परिपक्वता उस सिलेबस की बुलंदी तक बांध तक रखता है, लेकिन सही मायने में ज्ञान किसी सिलेबस का मोहताज नहीं होता है, ज्ञान अकेला स्वछंद होता है, उसे किसी परिणाम, परीक्षा या प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती वह खुद-ब-खुद अपना स्थान बना ही लेता है । उदाहरण के लिए इस संसार में ऐसी-ऐसी विभूतियां पैदा हुयी हैं जो किसी स्कूल या सर्टीफिकेट की मोहताज नहीं रही । उदाहरण के तौर पर कबीर, तुलसी, आइंस्टीन, आचार्य रामानुजम आदि बहुत सारे महानविभूतियां हैं जिन्होंने अपने ज्ञान से दुनिया को वो दे दिया जिससे आज संसार आह्लादित है । इसलिए हम आज के बच्चों से ये कहना चाहेंगे की बोर्ड परीक्षा बहुत महत्वपूर्ण है लेकिन ये कैरियर का अंतिम पड़ाव नहीं कि यहाँ से जिंदगी में कुछ किया नहीं जा सकता । बल्कि बोर्ड परीक्षा में सफलता पाने से ज्यादा महत्वपूर्ण बात यह है कि हमें एक अच्छा इंसान बनना और अपने विचारों को खुला रखना अपने आप को आंकना की हम किस लाइन के लिए उपयोगी हैं, तो शायद हम अपनी वास्तविक प्रतिभा को निखार पायें क्योंकि प्रतिभा सभी इंसान के अंदर होती है । कोई पढ़ाई में प्रतिभावान होता है तो कोई खेल में, कोई लेखक होता है तो कोई गीतकार होता है, आदि । ये जरूरी है कि हम अपने आप को पहचानते हुए हम अपने को सही दिशा दें और किसी भी प्रकार की असफलता से हतोत्साहित ना हों । इसके साथ ही हम सभी पाठक बंधुओं को होली की ढेर सारे शुभकामनाएं देते हैं, होली प्यार सौहार्द्र, मिलनसारिता का प्रतीक है । होली को परंपरागत और सलीके से मनायें । आज के चलन में फूहड़ता को ना आने दें क्योंकि जैसी भी होली हम मनाते हैं वह पूरे विश्‍व में हमारी संस्कृति की झलक पेश करती है । यदि हमारे होली मनाने में जरा सी भी फूहड़ता होगी तो बाहर हमारी संस्कृति का अपमान होगा । अतः एक बार फिर से होली की ढेर सारी शुभकामनाएं साथ ही सभी बोर्ड परीक्षार्थियों को भी शुभकामनाएं कि वो परीक्षा में अच्छे नंबरों से पास हों व जीवन के हर पड़ाव में अपना परचम लहराएं ।