साधना - एक जीवंत चेहरा........
“तू जहाँ-जहाँ चलेगा मेरा साया साथ होगा । ” आज भी इस गाने को सुनकर हम जाने किस अतीत में खो जाते हैं । आज की इस उथल-पुथल भरी जिंदगी में इस गाने के कान में पड़ते ही हम थोड़ी देर के लिए सुकून महसूस करने लगते हैं । आप को याद है सन् 1966 में आयी अभिनेत्री साधना अभिनीत चलचित्र ‘मेरा साया’ । इस फिल्म का एक एक गीत, और उन गीतों पर किया गया फिल्मांकन आज भी जब टेलीविजन स्क्रीन पर आपको दिखेगा तो लगता है कि सबकुछ सजीव हो उठा है । इस फिल्म में 60 वीं दशक की मशहूर अभिनेत्री साधना की खूबसूरती में चार-चाँद लगा दिये हैं । साधना का जीवंत चेहरा आज भी आंखों को सुकून देता है । साधना जैसी अभिनेत्रियां अब बड़ी मुश्किल से फिल्म इंड्रस्ट्री को मिल पाती हैं । 60 के दशक में अभिनेत्रियां तो बहुत सारी थीं लेकिन साधना की बात ही कुछ और थी । उनके हंसने का अंदाज, खिलखिलाहट, उनकी आंखें, उनका हेयर कट (साधना कट बहुत प्रसिद्ध हुआ था) सब कुछ औरों से ज्यादा आकर्षक मालूम पड़ता था । साधना का पूरा नाम साधना शिवदासानी था । इनका जन्म करांची में 2 सितंबर 1941 को सिंध प्रांत के सिंधी परिवार में हुआ था । बबीता इनकी भतीजी थी और बबीता के पिता हरि शिवदासानी इनके कज़न थे । साधना का परिवार भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के बाद मुंबई चला आया । इन्होंने 8 साल की उम्र तक अपने घर पर ही पढ़ाई की । इन्हें 1955 में राज कपूर की श्री 420 में कोरस गर्ल के रूप में रोल मिला था । फिर बाद में आर के नैयर निर्देशित ‘लव इन शिमला’ में इन्हें पहला लीडिंग रोल मिला और हिंदी फिल्मों में इनकी शुरूआत हो गयी । इस फिल्म में उनके अभिनेता जय मुखर्जी थे । सन् 1965 में इनकी शादी आर के नैयर साहब से ही हो गयी ।
लव इन शिमला के बाद सन् 1963 में इन्हें मेरे महबूब और राज खोसला की ‘वो कौन थी’ की शानदार कामयाबी के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखना पड़ा । बाद में राजकुमार, आरजू, अनीता, वक्त, मेरा साया, सीता और गीता, आदि ऐसी फिल्में रहीं जिसने इन्हें हमेशा बुलंदियों पर बनाए रखा । सन् १९९५ में इनके पति आर के नैयर साहब का निधन हो गया । साधना हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की चंद ऐसी अभिनेत्रियों में रहीं जिनकी एक अलग इमेज पूरे इंडस्ट्री पर रही । साधना आजकल मुंबई में अपने घर पर रह रही हैं और अपने गुजरे जमाने की सहेलियों जैसे वहीदा रहमान, आशापारेख, नंदा, हेलेन आदि के साथ लंच पर मिलती रहती हैं ।