करौंदा
करौंदा का वृक्ष झाड़दार जाति का होता है । उसमें कांटे होते हैं । इसके फूल सफेद होते हैं तथा फल-छोटे कच्चे सफेद लाली युक्त तथा पकने पर और लाल काले पड़ जाते हैं ।
करौंदा के वृक्ष दो प्रकार के होते हैं ।
एक प्रकार के करौंदों में छोटे फल लगते हैं । दूसरी प्रकार के करौदें में बड़े करौंदे लगते हैं ।
गुण-
कच्चा करौंदा खट्टा और भारी होता है । प्यास को शान्त करने में अति उत्तम है । रक्त पित्त को हरता है, गरम तथा रूचिकारी होता है । पका करौंदा, हल्का मीठा रूचिकर और वातहारी होता है ।
करौंदा का प्रयोग -
1. सर्प के काटने पर करौंदे की जड़ को पानी में उबालकर क्वाथ करें । फिर इस क्वाथ को सर्प काटे रोगी को पिलाने से लाभ होता है ।
2. घाव के कीड़ों और खुजली पर करौंदे की जड़ निकाल कर पानी में साफ धोकर उसे पानी के साथ महीन पीस कर फिर तेल में डालकर खूब पकायें, फिर इस तेल का प्रयोग घाव के कीड़ों और खुजली पर करने से फायदा पहुँचता है ।
3. ज्वर आने पर करौंदे की जड़ का क्वाथ बनाकर देने से लाभ मिलता है
4. खांसी में करौंदे के पत्तों के अर्स को निकालकर उसमें शहद मिलाकर चाटना श्रेष्ठ है ।
5. जलंदर रोग में करौंदों का शर्बत, हर दिन एक तोला दूसरे दिन दो तोला तीसरे दिन तोला इसी प्रकार एक हफ्ते तक एक तोला रोज बढ़ाते जाए । एक हफ्ते के भीतर लाभ मिलना शुरू हो जायेगा ।
6. करौंदा का प्रयोग मूंगा व चांदी की भस्म बनाने में भी किया जाता है । मूंगा भस्म बनाने के लिये कच्चे करौंदों को लेकर बारीक पीसें फिर उसकी भली भांति लुगदी बनाकर उस लुगदी में मूगों को रखें फिर उस लुगदी के ऊपर सात कपट मिट्टी कर, उपलों की आग में रखकर फूंके । पहल मन्दाग्नि, बीच में मध्यम तीक्ष्ण अग्नि दें तो मूंगा भस्म बन जायेगी ।
7. चांदी की भस्म करने के लिये करौंदों की लुग्दी बनाकर ऊपर की विधि द्वारा सही सम्पुट बनाकर फूकें । इस प्रकार इक्कीस बार फूंकने पर चांदी की भस्म बनेगी ।