तिल का ताड़ बनाने में माहिर हुए कॉन्फ्रेंस के नेता
25 मई 2010 शुक्रवार को कश्मीर की राजधानी श्रीनगर से 50 किलोमीटर उत्तर सोपोर मे भारत विरोधी प्रदर्शन के दौरान पुलिस फायरिंग में 2 लोगों की मौत हो गई । कश्मीर में अमन चैन के खिलाफ हुई फायरिंग इनको इतनी नागंवार गुजरी कि इन्होंने पूरे कश्मीर को अशांत कर दिया । अब प्रत्यक्ष रूप से कश्मीर आज भी कठपुतली की तरह आंतकी संगठनों विशेषकर लस्कर-ए-तैयबा से संचालित हो रहा है, जो जब चाहे तब कश्मीर में अशांति और आतंक का नया रूप पैदा कर सकते है, इसी घटना के आरम्भ में पुलिस फायरिंग विरोध में कश्मीर बंद का आह्वान किया गया है । इस बंद को हुर्रियत के दोनों गुटों का समर्थन हासिल हुआ है । प्रदर्शनकारी इस कदर हिंसक हो गये थे कि उन्होंने केन्द्रीय सुरक्षा बल की जीप को आग लगा दी और पत्थर फेंके । मास्क पहने दो लोगों ने सुरक्षा बलों पर गोलियां भी चलाई ।
जवाबी कार्रवाई में सुरक्षा बलो ने भी फायरिंग की जिसके नतीजे में दो लोगों की मुत्यु हो गयी और तीन अन्य घायल हो गये । लेकिन यह घटना उस समय हुई जब पृथ्क्तावादी संगठन हुर्रियत कांफ्रेस (गिलानी गुट) के आह्वान पर घाटी में तरह बंद बनाया जा रहा था । गिलानी गुट ने शुक्रवार से कश्मीर छोड़ो का नारा दिया था और इसकी शुरूआत शुक्रवार को बंद के आह्वान से हुई । इस बीच हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के दोनों धड़ों ने शुक्रवार को ‘सोपोर चलो’ का नारा दिया । आंतकवादियों द्वारा किये गये किसी भी हमले में चाहे कितनों की मौत हो जाये किसी के कान में जूँ तक नहीं रेंगती, अभी 23 जून को एक मुठभेड़ में कर्नल की मौत हुई तब हुर्रियत मतों को कोई दिक्कत नही हुई, और आज खुद राज्य विरोधी गतिविधियों या अमन चैन विरोधी प्रदर्शन में अगर सुरक्षा बल द्वारा कोई कार्यवाही करने के दौरान कोई घटना घट गई तो इसका इतना बडा तिल का ताड बनाना कहां तक जायज़ है ।
इससे यह स्पष्ट दिखाई देता है कि हमारी केंद्र सरकार किस हद तक कमजोर है तथा कोई भी सकारात्मक निर्णय लेने में असमर्थ है । ऐसे में भारतीय बाहर बैठे आतंकियों द्वारा आंतक के खिलाफ कठपुतली बनकर रह गये है । इस छोटी सी घटना का अंजाम है कि अनंतनाग मार्ग, मत्तन, कुलगाम, कोइमो, और सोपोर में कर्फ़्यू जारी है, जबकि श्रीनगर में अघोषित कर्फ़्यू है । श्रीनगर में कर्फ़्यू की घोषणा तो नहीं की गई है लेकिन आवाजाही में प्रतिबंध है । सोपोर में शुक्रवार को कर्फ़्यू लगा था और इसके बाद से वहां कर्फ़्यू चल रहा है । इस घटना के बाद अनंतमार्ग में भारी विरोध प्रदर्शन हुआ था और प्रदर्शनकारियों ने कई वाहनों में आग लगा दी थी । बुधवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भारत प्रशासित कश्मीर की स्थिति पर विचार करने के लिए एक उच्च बैठक आयोजित की थी, उसके बाद गृहमंत्री पी चिदंबरम ने कहा था कि सोपोर में चरमपंथी संगठन लश्कर तैबा सक्रिय है ।
चिंदबरम ने कहा कि कश्मीर के कई हिस्सों में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के पीछे कुछ राष्ट्रविरोधी ताकते सक्रिय है जो चरमपंथियों के साथ मिलकर काम कर रही है । ऐसे में दूसरी ओर अमरनाथ यात्रा का पहला जत्था गुरूवार को पहलगाम से गुफा की ओर सकुशल रवाना हो गया ।
अमरनाथ जत्था की सुरक्षा के लिए कड़े इतंजाम किये गये है । कश्मीर के पुलिस अधीक्षक फारूक अहमद ने बताया कि सुरक्षा के लिए अतिरिक्त इंतजाम किए गए है । उन्होंने बताया कि सीमा सुरक्षा बल की छह कंपनियों को तैनात किया गया है । चरमपंथियों के हमलों की आशंका के कारण यात्रा की सुरक्षा बढ़ा दी गई है ।