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Today : 07-02-2012 
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अँजोरे- अँजोर


हमरे मनवा में ल‍उके अँजोरे-अँजोर
ना बुझाला कुछू तोर ना बुझाला कुछू मोर
अँजोर अँजोर ! हमरे मनवा में ... ....


तोर - मोर के भेद भुला के रस बरिसे बदरिबा
किरिन ताल में पँवरे चमके झोपड़िया अटरिया
दुअराँ - दुअराँ खरहर झारे घूमि घूमि बेयरिया
बड़ भिनुसारे चिरई बोले खोल राम केंवड़िया


प्रीति पागे सराबोर गीति गूंजे पोर पोर
अँजोरे-अँजोर ! हमरे मनवा में ... ...


परम तत्व पर ध्यान लगावे आसन मारें ज्ञानो
एक सूत में बान्हल देखे ई दुनिया असमानी
जोतें कोड़ें खेत बनावें खून पसेना पानी
बीज वीज के शक्‍ति अपरिमित साबित करे किसानी


केहू साहु ना बुझाला ना बुझाला केहू चोर
अँजोरे-अँजोर ! हमरे मनवा में .... ....


होते साँझ किरिनिया, द‍उरी मूँडी पर उठावें
अन्तरीक्ष में धीरे धीरे आपन डेग बढ़ावे
पानी कुल्ही बरिसि ग‍इला पर बादर घर चलि जावें
धरती पर के जीव मगन मन झूमें गुन-गुन गावे


कुछू ढेर ना बुझाला ना बुझाला कुछू थोर
अँजोरे- अँजोर ! हमरे मनवा में ... ...


एइसन ना होखे त समुझीं धूंआ उठे लहरिया
बाहर भले अँजोरिया टहके घुहकी भीतर अन्हरिया
करिया चद्दर ओढ़ि के घूमे सहर बाजर नागरिया
केतनो चाकर सड़कि बनाईं होई वन्द डहरिया


र‍उरा होखीं ना कठोर जियरा उठे ना मरोर
अँजोरे- अँजोर ! हमरे मनवा में ... ...


- मोती बी.ए.


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