यथार्थ
राह का नहीं है अंत चलते रहेंगे हम!
दूर तक फैला अँधेरा नहीं होगा ज़रा भी कम!
टिमटिमाते दीप-से अहर्निश जलते रहेंगे हम!
साँसें मिली हैं मात्र गिनती की अचानक एक दिन
धड़कन हृदय की जायगी थम!
समझते-बूझते सब मृत्यु को छलते रहेंगे हम!
हर चरण पर मंज़िलें होती कहाँ हैं?
ज़िन्दगी में कंकड़ों के ढेर हैं मोती कहाँ हैं?
महेंद्रभटनागर