आर्थिक कार्य के लिए भारत और ईरान साथ
भारत ने आर्थिक सुदृढ़ता के लिए ईरान की तरफ कदम बढ़ाया है । भारत के साथ-साथ अन्य महत्वपूर्ण देश संयुक्त आयोग की 16 वें सत्र की बैठक करेंगे । दो दिन की संयुक्त आयोग की बैठक की अध्यक्षता विदेश मंत्री एस.एम. कृष्णा और ईरान के वित्तमंत्री सैय्यद शमसेद्दीन हुसैनी के द्वारा की गई ।
भारत और ईरान पहले भी आर्थिक सहायता से सम्बन्धित मुद्दों पर संयुक्त आयोग में बात करते रहे हैं, जो जुलाई 1983 में किया गया था । संयुक्त आयोग की अंतिम बैठक तेहरान में अक्टूबर 2008 में हुई थी ।
तीन दिन तक चली इस बैठक में विदेश सचिव निरूपमा राव ने उन देशों द्वारा ईरान के खिलाफ लगाये गये एकतरफा प्रतिबंधों पर चिन्ता व्यक्त की और कहा कि इसको बनाये रखने से देश की ऊर्जा सुरक्षा और भारतीय कंपनियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा ।
ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से ईरान भारत के लिए एक महत्वपूर्ण देश है । भारत ने बार-बार इस बात को कहा है कि इसके लगातार आर्थिक विकास के लिए दुनिया के सभी भागों से ऊर्जा स्रोतों को लेना मुश्किल है और ईरान को इस संभावना के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी ।
राव ने संयुक्त सहयोग की परियोनाओं के बारे में बताया जैसे छभार पत्तन, ऊर्जा सहयोग, आर्थिक बंधनों और आतंकवाद जैसे कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्र होंगे जो शीर्ष के एजेंडा हैं । उन्होंने अफगानिस्तान की स्थिति पर ईरान के साथ तयशुदा, व्यवस्थित और नियमित विचार-विमर्श की आवश्यकता को भी दोहराया ।