बाहरी हम नहीं ‘वो’ हैं
- धन्नु मिश्रा
एक बार फिर से बाहरी का मुद्दा सामने आया है । इस बार इसमें मायानगरी मुंबई शामिल नहीं है, बल्कि दिलवालों की दिल्ली है । वैसे तो दिल्ली के उपराज्यपाल मजदूरों के लिए पहचान पत्र वाला बयान पहले भी दे चुके हैं, लेकिन इस बार मोर्चा संभाला है, दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने दिल्ली में बढ़ते यातायात की समस्या के लिए बाहरी लोगों को जिम्मेदार ठहराया है । जिसमें यूपी, बिहार, हरियाणा आदि के लोग शामिल हैं ।
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दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने दिल्ली में बढ़ते यातायात की समस्या के लिए बाहरी लोगों को जिम्मेदार ठहराया है । जिसमें यूपी, बिहार, हरियाणा आदि के लोग शामिल हैं ।
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वन इंडिया में प्रकाशित खबर के मुताबिक शीला दीक्षित जी का ऐसा बयान दिसंबर के आखिरी हफ्ते में आया है । ये एक न्यू इयर गिफ्ट था दिल्ली के ‘बाहरियों’ के लिए । सवाल तो यह है कि ये ‘बाहरी-बाहरी क्या है? बाहरी कौन हैं? हम भारत के किसी भी राज्य से अपने देश की राजधानी में प्रवेश करते हैं, तो हम तो भारत में ही हुए ना तो फिर हम बाहरी कैसे हुए । ये तो हुयी पहली बात दूसरी बात ये है कि हमारे देश में 2 करोड़ के करीब बांग्लादेशी घुसपैठिये हैं (समाचार पत्रों में प्रकाशित आंकड़ों के आधार पर) नशे के व्यापार में आये दिन गिरफ्तार होते नाईजिरियाई लोग हैं, दिल्ली में ‘सीनियर सिटिजन’ के घर में नेपाली नौकर हैं जो उन्हीं की हत्या कर लाखों का माल लेकर नेपाल को रवाना हो जाते हैं । ये जो उपरोक्त लोगों की गाथाएं हैं तो क्या ये बाहरी नहीं हैं, क्या इन पर हल्ला मचाने की जरूरत नहीं है ।
एक आंकड़े के मुताबिक हमारे देश में 4 करोड़ लोग बेरोजगार हैं, ठीक है तो भई 4-2 करोड़ बांग्लादेशी, जो किसी ना किसी तरह तो अपना पेट भारत में पाल ही रहे हैं तो 2 करोड़ भारतीय को तो रोजगार मिल पा रहा है ना । मुंबई में आये दिन राज ठाकरे, बाला साहेब ठाकरे के लोग उत्तर भारतीयों के लिए मुसीबतें खड़ी करते हैं, क्योंकि वे बाहरी नहीं हमारे देश के ही हैं, इसलिए उनपर बाहरी का तगमा लगाकर उन्हें धक्के मारे जाते हैं, अगर बाहरियों से इतनी ही चिढ़ है इन नेताओं को तो मुंबई में अपराध में लिप्त बांग्लादेशियों के खिलाफ मोर्चा खोलो ना ।
बाहरियों के आने से दिल्ली की मुख्यमंत्री साहिबा घबरा गयीं, क्या आपकी घबराहट के कारण ही आपको दिल्ली के लोगों ने तीसरी बार दिल्ली का सीएम चुना । लोग आते हैं, आएंगे ही , आखिर देश की राजधानी है भई पूरे देश की सरकारें चलती हैं यहां से आप इसके लिए सुविधाएं बढ़ाएं, सुविधाएं कम पड़ जाएं तो और बढ़ाएं, आखिर इससे दिल्ली का विकास ही तो होगा फिर विकास से घबराहट कैसी ?