भ्रष्टाचार उन्मुक्त समाज वक्त की दरकार
- डॉ. भरत मिश्र प्राची
एक ऋषि द्वारा बहेलिया के जाल में फंसे कबूतरों को मुक्ति दिलाते हुए उपदेश दिया गया.. ‘बहेलिया आयेगा, दाना डालेगा, लोभ से उसमें फंसना नहीं ।’ इस उपदेश को कबूतरों ने अक्षरशः याद कर लिया, कई दिनों तक सस्वर पाठ करते रहे । एक दिन ऋषि ने उन सारे कबूतरों को आश्रम से यह समझकर कि कबूतरों ने उपदेश को सही ढंग से ग्रहण कर लिया है, मुक्त गगन की ओर स्वतंत्र विचरण हेतु छोड़ दिया । कुछ ही दिन बाद वे सारे कबूतर बहेलिया के जाल में फंसे मिले तथा उन्होंने उसी तरह ऋषि के उपदेश को याद तो कर लिया, लेकिन अपने जीवन में नहीं उतारा, यही हाल आज पूरे परिवेश का हो रहा है जहां प्रारंभिक कक्षा में बच्चों में यह पाठ पढ़ाया जाता है.. झूठ बोलना पाप है, चोरी करना महापाप, जीवन में सदा सत्य बोलना चाहिए’ पर यह पाठ कितने अपने जीवन में सही ढंग से उतार पाते हैं, आसानी से देखा जा सकता है । यह यहीं तक सीमित नहीं, नौकरी से घर आने वाले हर व्यक्ति से जानने की उत्सुकता ज्यादा रहती है कि उसकी ऊपरी कमाई कितनी है । यह ऊपरी कमाई क्या है? यही तो भ्रष्टाचार है ।
किसी कार्यालय में समस्या समाधान के लिए यदि जाना पड़ जाय तो सामने बोर्ड पर लिखे संदेश ‘कर्म ही उपासना है’... ‘लेना और देना दोनों अपराध है’... आदि-आदि मिल ही जायेंगे परन्तु वहां जो समस्याएं उभकर सामने आती हैं इस संदेश को नकारात्मक साबित करते हुए एक ही मानसिकता का विकास कर जाती हैं कि यहां बिना लिये दिये कोई काम नहीं हो सकता । यही तो भ्रष्टाचार है । आज इस परिवेश ने इस तरह ग्रसित कर दिया है कि नौकरी पानी हो या विकास का कोई काम कराना हो या अपनी दैनिक समस्याओं का समाधान निकालना हो तो एक ही बात उभरकर सामने आती है कि बिना दिये कोई काम नहीं हो सकता और हम सभी इस भ्रष्टाचार रूपी बीमारी से ग्रसित होकर विवेकशून्य होते जा रहे हैं ।
पूर्व सरकार ने क्षेत्र में विकास हेतु सांसदों को 2 करोड़ की राशि प्रतिवर्ष खर्च करने की अनुमति दी । अब इस राशि में काफी वृद्धि भी की जा चुकी है । शुरू में यह एक अच्छी सोच थी, परन्तु विकास योजना के तहत स्वीकृत राशि का कितना सदुपयोग हुआ या दुरूपयोग यह सर्वेक्षणीय प्रक्रिया में सही ढंग से देखा जा सकता है । क्षेत्रों में विकास कार्य तो हुए परन्तु जिस रूप में होना चाहिए उस रूप में नहीं हो सके जिसका कारण मुख्य रूप से इस प्रक्रिया में बिचौलियों की भूमिका रही । यही भूमिका तो भ्रष्टाचार है ।
स्वतंत्रता उपरान्त जनप्रतिनिधियों के अभिनंदन की परम्परा चली । अभिनंदन होना भी चाहिए । अभिनंदन में फूलों के हार की जगह धीरे-धीरे नोटों की माला ने ले ली । सिक्कों से जनप्रतिनिधियों को जगह-जगह तौला जाने लगा । इस तरह की व्यवस्था में बढ़-चढ़ कर उस तरह के लोगों की तस्वीर सामने आने लगी जो किसी तरह के असामाजिक गतिविधियों में लिप्त रहे हैं । जो किसी न किसी रूप में विकास कार्यों के पैसे के सदुपयोग-दुरूपयोग के बीच अपनी भूमिका निभाते रहे हैं । इस तरह की व्यवस्था ही तो भ्रष्टाचार है ।
इस तरह भ्रष्टाचार का यह रूप राजनीतिक, प्रशासनिक, सामाजिक हर क्षेत्र में छूत रोग की तरह फैल चुका है जिससे शायद ही कोई बचा हो । इसी कारण आज सरकारी/अर्द्धसरकारी प्रतिष्ठानों, विभागों की हालत दयनीय होती जा रही है । इन विभागों में फैले छूत रोग को दूर करने के बजाय इनसे मुक्ति पाने के रास्ते तलाशे जा रहे हैं । इस मुक्ति मार्ग में भी भ्रष्टाचार किसी न किसी रूप में खड़ा मिल जायेगा ।
अब प्रश्न यह उभरता है कि इस तरह के खतरनाक छूत रोग से बचाव कैसे हो? इस पर गंभीरता से मंथन होना चाहिए । भ्रष्टाचार से निजात पाने के लिए सर्वप्रथम हमें राजनीतिक/सामाजिक शुद्धिकरण की आवश्यकता है । जहां से भ्रष्टाचार के पग पसारने के आसार बनते हैं । राजनीतिक/सामाजिक स्तर पर हमारी सोच बदलनी चाहिए तथा नियंत्रण की डोर मजबूत होनी चाहिए । वर्तमान समय में राजनीतिक क्षेत्र में समाज के अनैतिक कार्यों में लिप्त लोगों का वर्चस्व/वजूद बढ़ता जा रहा है । राजनीतिक दल भी बढ़-चढ़कर ऐसे लोगों के गिरोह के शिकार होते जा रहे हैं जो येन-केन-प्रकारेण उनके दल को सत्ता तक पहुंचा सकें । इस तरह की प्रक्रिया से कभी भी भ्रष्टाचार जैसे छूत रोग से मुक्ति नहीं मिल सकती । यदि दारू के ठेकेदार, हत्या, बलात्कार, अपहरण की घटनाओं में लिप्त व्यक्ति हमारे लोकतंत्र के प्रहरी बनें और हम सभी आंख बंदकर इनके पीछे-पीछे मूक दर्शी बन घूमते रहे, तथा जगह-जगह अनैतिक लोगों के हो रहे अभिनंदन में शामिल होकर अपना मौन समर्थन देते रहे तो बताएं लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा किस प्रकार हो सकेगी । इस तरह के बिंदुओं पर हमें गंभीरता से विचार करना होगा । देश में लोकतंत्र के बीच सही नेतृत्व की पृष्ठभूमि उभर सके, इस तरह की सोच, कार्यवाही एवं समर्थन की भूमिका ही देश को भ्रष्टाचार रूपी छूत रोग से निजात दिला सकेगी ।