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Today : 07-02-2012 
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आशिक क्यों करता है माशूक का कत्ल

- चांद खां रहमानी
महबूबा नहीं मिली तो उसका कत्ल कर दिया । प्रेमिका ने प्यार से इनकार किया तो उसके चेहरे पर तेजाब डाल दिया । प्रेयसी नहीं मिली तो हताशा में खुद ही दुनिया छोड़ दी । कभी ऐसा होता है कि उसे मारकर खुद भी खुदकुशी कर ली । तू मेरी नहीं तो किसी की नहीं । तुझे हर हाल में मेरी होना होगा । पहले ऐसी घटनाएं दोचार साल में एकाध होती थीं । इससे पहले इसका अनुपात और भी कम था । लेकिन आजकल ऐसी वारदातें आम हो गई हैं । जिधर देखो उधर इस तरह के अपराध हो रहे हैं । अखबारों में ऐसी घटनाएं आम हो गई हैं । सवाल यह है कि अब मोहब्बत में ऐसी क्या खोट आ गई है कि कुर्बानी देने की बजाय जान लेने पर उतर आई है । पहले लोग मोहब्बत में सब कुछ कुर्बान कर देते थे लेकिन अपने महबूब/महबूबा पर आंच नहीं आने देते थे । आज प्यार में भी सामंती सोच हावी हो गई है । मनोचिकित्सक इसके ऐसे ही कारण बता रहे हैं । अभी हाल में हरियाणा में शादी से मना करने पर लड़के ने लड़की की हत्या कर दी । दोनों की शादी तय हो चुकी थी लेकिन किसी बात को लेकर लड़की ने शादी से इनकार कर दिया । 8 फरवरी 2010 को हापुड़ के थाना हाफिजपुर के गांव झदौदा सिहानी में जमील ने एक युवती के ऊपर तेल झिड़क कर आग लगा दी । युवती जिंदगी और मौत से एक निजी अस्पताल में जूझती रही है । युवती को जलाने का कारण बताया गया कि युवक उससे प्यार करता था और शादी करने के लिए दबाव बना रहा था । जब युवती ने शादी करने से मना किया तो उसने उसकी जान लेने की कोशिश की । ऐसी अनेक घटनाएं हैं जिनका आगे जिक्र है । मशहूर शायर साहिर लुधियानवी ने कहा था कि मोहब्बत एक बेगाने को अपनाने की जिद है । उसी जिद के कारण नादान मोहब्बत और स्वार्थी प्यार की परिणति मौत के दरवाजे पर जाकर खत्म हो रही है ।

आज प्यार का स्वरूप स्वार्थ में तब्दील हो चुका है । आज के युवक युवतियां प्यार को शायद शारीरिक भूख मिटाने की साधन भर मानते हैं । क्या शारीरिक आकर्षण ही प्यार है? क्या देह ही सब कुछ है नारी का कोई वजूद नहीं? ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि आज के युवा, किशोर और प्रौढ़ मोहब्बत में जान लेने में जरा भी गुरेज नहीं कर रहे हैं । जान नहीं ले पाए तो उसका चेहरा खराब कर दिया । कहने का आशय है कि न तो प्रेमी में और न प्रेमिका में धीरज नाम की चीज नहीं है । इधर बात हुई नहीं कि उधर शारीरिक सुख तुरंत चाहिए । एकतरफा प्यार की घटनाओं में भी बढ़ोत्तरी हो रही है । ऐसी मोहब्बत का नतीजा मौत या जल्दी शादी या जल्दी तलाक । स्थायित्व न तो प्यार में और न शादी में ।

हम लैला मजनू या हीर रांझा के दौर की बात नहीं कर रहे हैं । हम बात कर रहे हैं फिल्मी दुनिया की । औरत और मर्द के बीच के रिश्तों को लेकर सबसे ज्यादा बॉलीवुड बदनाम है । फिल्म वालों के रिश्ते बहुत कमजोर और शारीरिक आकर्षण तक सीमित बताए जाते हैं । लेकिन इस बदनाम बस्ती में भी प्यार का सम्मान हुआ है । देवानन्द और सुरैया ने प्यार को आखिर तक निभाया । सुरैया अगर तमाम जिंदगी कुंवारी रहीं तो देवानन्द भी उन्हें याद करते रहे । आशा पारेख के बारे में बताया जाता है कि वे नासिर हुसैन से प्यार करती थीं और आज तक कुंवारी बैठी हैं । चेतन आनन्द और प्रिया राजवंश के प्यार के बारे में कौन नहीं जानता । दोनों ने पूरी उम्र प्यार के रिश्ते को निभाया । नन्दा मनमोन देसाई से प्यार करती थीं और करती हैं । दोनों की शादी होने से पहले ही देसाई साहब चल बसे । गुरूदत्त वहीदा रहमान पर मरते थे । उनकी मोहब्बत में गुरूदत्त ने खुद जान दे दी मगर वहीदा रहमान को दुखी नहीं होने दिया । गौहर और चंदुलाल का किस्सा पुराने लोगों को आज याद है । इनके अलावा अपने आसपास ऐसे तमाम उदाहरण हैं जो यह बताते हैं कि प्रेमी ने कितनी भी मुसीबत झेली मगर महबूबा को जरा भी चोट नही पहुंचने दी । उसे चोट लगती थी आह खुद निकलती है ।

लेकिन आज ऐसा नहीं है । 14 अक्टूबर 2009 को पढ़ने को मिला कि एमबीए की छात्रा जो अपना ब्यूटी पार्लर भी चलाती थी, को उसके प्रेमी ने उसके और उसकी बहन के चेहरे पर तेजाब फेंक दिया क्योंकि किन्हीं घरेलू कारणों से लड़की ने उससे शादी करने से इनकार कर दिया था । युवक अफरोज इस समय जेल में है और उसका साथी दोस्त फरार बताया जाता है । 31 सितम्बर 09 को गाजियाबाद में 17 वर्षीय रानू ने 14 वर्ष की कीर्ति की गोली मारकर हत्या कर दी और खुद को भी गोली मार ली । यह अलग बात है कि वह बच गया । बताया जाता है कि रानू कीर्ति से प्यार करता था । रानू ने रिवालवर अपने मालिक के यहां से ली थी । इसी बीच 24 सितम्बर को साहिबाबाद के जनकपुरी में एक और घटना हुई । एक रिटायर्ड कर्मचारी की बहुत पढ़ी-लिखी बेटी रचना बुलंदशहर के एक स्कूल में टीचर थी उसका 26 वर्षीय प्रेमी आलोक मेरठ कालेज में भूगोल का छात्र था । पारिवारिक दबाव के चलते रचना ने उसके साथ संबंध बनाने से मना किया तो उसने उसे गोली मार दी और खुद भी मर गया । इसी तरह उत्तम नगर दिल्ली की रहने वाली खुशी को 8 सितम्बर को 25 वर्षीय दिलीप यादव ने चाकू से वार कर घायल कर दिया । खुशी ने उसके साथ जाने से मना कर दिया था ।

ये कैसी मोहब्बत-

* प्रेमिका की हत्या करने पीछे युवक/युवतियों में की सामंती सोचः डा. टीपी जिंदल (मशहूर मनोचिकित्सक, दिल्ली)

* आज युवक युवतियां प्यार को शायद शारीरिक भूख मिटाने का साधन भर मानने लगे हैं ।

* प्रेमी प्रेमिका में धैर्य नहीं,
प्रश्न यह है कि क्या यह वाकई मोहब्बत है? नहीं, ये वासना है । प्यार कुर्बानी मांगता है । दुश्मन की तरह जान नहीं लेता है । उपरोक्‍त घटनाएं यह बताने के लिए काफी हैं कि आज मोहब्बत में न तड़प है न जज्बा, न त्याग है न संयम । मोहब्बत संयम का दूसरा नाम है । सवाल यह कि आज का प्यार टिकाऊ नहीं होता । आज का प्यार कुर्बानी देने की जगह जान ले रहा है । महबूबा को नेस्तनाबूत करने की बात मन में आ रही है । क्या समाज का बदलता स्वरूप, बदलते मूल्य, बढ़ती आधुनिकता, घटता संयम, डिप्रेशन, टीवी और सिनेमा का असर प्यार पर भी पड़ा है ।

इस संबंध में मशहूर मनोचिकित्सक डा. टीपी जिंदल कहते हैं जो लोग प्रेमिका को मार देते हैं या उस पर तेजाब फेंक देते हैं ऐसे लोग सामंती मनोवृत्ति के शिकार होते हैं । ऐसे लोग ठाकुरों जमीदारों की सोच के होते हैं यानी जिस चीज पर हाथ रख दिया या जिसे अपना मान लिया उसे हर कीमत पर पाना चाहते हैं । ऐसे लोग मानते हैं कि मेरी नहीं हुई तो किसी की नहीं । कुछ लोग इसलिये मार देते हैं कि उन्हें लगता है कि जिसे वह अपनी मानता था उसने उसे धोखा दिया है । इसलिए वह उससे बदला लेता है । कुछ लोग प्रेमिका को मारकर हताशा में आत्महत्या कर लेते हैं कि अब वह भी जी कर क्या करेंगे । लेकिन सबसे बड़ा कारण सामंती मनोवृत्ति है । कुछ लोग एकतरफा प्यार कर बैठते हैं और भ्रम में जीते रहते हैं । ऐसे युवक भी हत्या करने से नहीं चूकते ।

उक्‍त आलेख के समर्थन में प्रस्तुत है डॉ. ए. कीर्तिवर्द्धन की एक रचना ‘कत्ल का जश्न’ भी यहाँ पूर्णतयाः प्रासंगिक है-

कत्ल का जश्न, मनाते हैं दरिन्दे अक्सर
कत्ले इश्क पर, वे भी हँसा नहीं करते
जमाने का चलन, इस तरह बदला ‘कीर्ति’
लोग इश्क भी कत्ल की खातिर करते ।


पूछते ख्वाहिश इश्क से आखिरी मर्तबा
बेवफा, कत्ल का स्वांग रचाने से पहले
कर दिया खूं उन्होंने मेरे अरमानों का
गैर के पहलू में, जश्न मनाने से पहले ।


- डॉ. ए. कीर्तिवर्द्धन





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