खगड़िया (3-4 जुलाई 2010) हिन्दी भाषा साहित्य परिषद् खगड़िया (बिहार) के दो दिवसीय दसवें महाधिवेशन ‘महादेवी वर्मा स्मृति पर्व’ का आगाज आर्य कन्या उच्च विद्यालय खगड़िया के प्रांगण में कैलाश झा किंकर रचित ‘जय-जय-जय साहित्य पताका’ के गायन के साथ झंडोत्तोलन से हुआ । कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ० तेज नारायण कुशवाहा, राष्ट्रीय अध्यक्ष अ. भा. अं साहित्य कला मंच ने किया । जबकि अध्यक्षता कृष्णदेव चौधरी ने की । मुख्य अतिथि के रूप में डॉ० शिव मंगल सिंह ‘मानव’ केन्द्र निदेशक आकाशवाणी भागलपुर एवं विशिष्ट अतिथि के रूप मे रामचरण सिंह साथी (दिल्ली), सुरेन्द्र दीप (पश्चिम बंगाल), दिनकर शर्मा (झारखंड), डॉ० सतीश राज पुष्करणा (पटना), डॉ० प्रेम चन्द पांडेय (भागलपुर), एवं डॉ० भगवान सिंह भास्कर (सीवान) मंचस्थ थे । डॉ० तेजनारायण कुशवाहा ने दीप प्रज्वलित कर के एवं महादेवी वर्मा के तैल चित्र पर माल्यार्पण करके कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए कहा कि महादेवी वर्मा का सारा साहित्य लौकिक प्रेम की विरह वेदना की अनुभूतियों से भरा-पड़ा है । वस्तुतः महादेवी वर्मा साहित्य का आईना थीं । बोढ़ मेहता बिहारी ने कहा कि महादेवी जी में बौद्धिक अन्तर्दृष्टि, मानसिक अन्तर्दृष्टि और वाचिक अन्तर्दृष्टि का समावेश था । वहीं राजेन्द्र राजेश ने कहा कि महादेवी की वेदना सम्पूर्ण मानव जाति की वेदना बन जाती है और अन्ततः अलौकिकता को प्राप्त होती है । सुरेन्द्र दीप ने माना कि महादेवी की पीड़ा व्यक्ति से समष्टि की ओर जाती है । प्रो० चन्द्रिका प्रसाद सिंह विभाकर ने कहा कि महादेवी वर्मा की अन्तर्दृष्टि पीड़ावाद में है । भगवान सिंह भास्कर ने कहा कि महादेवी जी ने समाज के प्रत्येक पक्ष पर ध्यान दिया । डॉ० सतीश राज पुष्करण ने कहा कि महादेवी के काव्य में भाव की चेतना का उच्चतम विकास हुआ है । उनकी वेदना कई भावों को पार कर रहस्यवाद तक पहुँचती है । रामचरण सिंह साथी ने महादेवी को एक सम्पूर्ण रचनाकार बताया । दिनकर शर्मा, डॉ० शर्मा, डॉ० रमेश नीलकमल, प्रेमचन्द पांडेय एवं मोहिबुल्लाह के बाद डॉ० आरती स्मित ने कहा कि स्त्री का समर्पण सम्पूर्णता के सतह होता है । दीपक की तरह नारी भी जलकर प्रियतम का पथ आलोकित करती है । डॉ० शिव मंगल सिंह मानव ने कहा कि महादेवी जी ने अपनी अन्तर्वेदना को काव्य का रूप देकर उसे सार्वजनिक बना दिया । साहित्य में उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता । ‘महादेवी वर्मा की साहित्य अन्तर्दृष्टि’ विषयक परिचर्चा के पूर्व स्वागताध्यक्ष कविता परवाना ने स्वागत भाषण पढ़ा और कैलाश झा किंकर ने प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया । साथ ही डॉ० कमलाकान्त प्रसाद सिंह कमल रचित कविता संग्रह ‘जीवन पथ’ का लोकार्पण डॉ० तेजनारायण कुशवाहा ने किया ।
प्रथम सत्र (उद्घाटन सत्र) का मंच संचालन शंकर कैमूरी, कार्यक्रम अधिशासी, आकाशवाणी भागलपुर ने किया । प्रथम सत्रांत भाषण मे कृष्णदेव चौधरी ने ‘हिन्दी भाषा साहित्य परिषद् खगड़िया के एक दशक के कार्य कलापों पर एक विहंगम दृष्टि’ के अन्तर्गत कहा कि महासचिव कैलाश झा किंकर और सचिव नन्देश निर्मल परिषद् की दो आँखें हैं जिनकी बदौलत यहाँ लेखन, प्रकाशन एवं आयोजन की त्रिवेणी बहती है ।
द्वितीय सत्र सांस्कृतिक कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ० सोहन कुमार सिन्हा ने की । मुख्य अतिथि के रूप मे राज कुमार प्रेमी (पटना) एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में चम्पा राय, प्राचार्य, माँ मनसा संगीत महाविद्यालय खगड़िया की थी । संचालन शिव कुमार सुमन ने किया । कपिलदेव ठाकुर, रवि शंकर चौधरी, कीर्ति आलोक, सुशीला रानी, मिताली, मनीषा, वन्दना, सुरभि, सुप्रिया, सदभावी एवं अणिमा रानी को काफी सराहा गया ।
तृतीय सत्र कवि सम्मेलन की अध्यक्षता डॉ० रामदेव प्रसाद शर्मा ने की । मुख्य अतिथि के रूप में छन्दराज एवं विशिष्ट अतिथि के रूप मे सुरेन्द्र दीप, डॉ० अशोक गुलशन, जी.पी मधुकर (उत्तर प्रदेश), डॉ० सिद्धेश्वर काश्यप (झारखंड), डॉ० सतीश राज पुष्करणा, तथा राज कुमार प्रेमी मंचस्थ थे । संचालन सुधीर कुमार प्रोगामर (सुलतानगंज) ने किया । कवि सम्मेलन में काव्य पाठ करने वालों में उपरोक्त कवियों के अलावे शिरोमणि महतो, डॉ० भगवान सिंह भास्कर, डॉ० प्रेम चन्द्र पांडेय, श्री नारायण पंडित, कैलाश बिहारी चौधरी, गणेश राज, नन्देश निर्मल, कैलाश झा किंकर, कपिलेश्वर कपिल, डॉ० सोहन कुमार सिन्हा, कविता परवाना, डॉ० कुमारी मनीषा, शिव कुमार सुमन, डॉ० कमला कान्त प्रसाद सिंह कमल, ई० रामचन्द्र मंडल, राम चरण सिंह साथी, जमाल खाँ परवाना, प्रो० चन्द्रिका प्रसाद सिंह विभाकर, पं० कमल नारायण झा, विश्वनाथ, विभूति नारायण सिंह विमल आदि प्रमुख थे । कौशिकी त्रैमासिक के ३३ वें अंक का विमोचन रामचरण सिंह साथी ने किया जबकि डॉ० कुमारी मनीषा के शोध मंच ‘प्रेमचन्द्र के उपन्यासों के गौण पात्र’ का लोकार्पण डॉ० तेज नारायण कुशवाहा ने किया ।
चतुर्थ सत्र सम्मान समारोह में राम चरण सिंह साथी को जितेन्द्र कुमार रजत स्मृति सम्मान, डॉ० अशोक गुलशन को रामधारी सिंह दिनकर रजत स्मृति सम्मान, जी०पी० मधुकर को विद्यापति रजत स्मृति सम्मान, शिरोमणि महतो को राम बली परवाना रजत स्मृति सम्मान, डॉ० सतीश राज पुष्करणा को विधान चन्द्र राउ रजत स्मृति सम्मान, सुरेन्द्र दीप को मदन लाल अग्रवाल रजत स्मृति सम्मान, कविता परवाना को अमृता प्रीतम रजत स्मृति सम्मान, गणेश राज को दुष्यंत कुमार रजत स्मृति सम्मान एवं नन्देश निर्मल को सूर्य नारायण प्रसाद रजत स्मृति सम्मान के साथ-साथ उत्सर्ग-पाठक मंच की ओर से दो हजार चार सौ एक ५० रू० से पुरष्कृत किया गया । स्वतंत्रता सेनानी रामोदित साहु स्वर्ण सम्मान से राम चरण सिंह साथी को अलंकृत किया गया । सभी सम्मानित साहित्यकारों को लोककवि रामबली परवाना की धर्म पत्नी, कवियित्री कविता परवाना की माँ एवं कवियित्री सपना परवाना की नानी सरस्वती परवाना ने पीत अंगवस्त्रादि से अलंकृत किया । सम्मान सत्र की अध्यक्षता प्रो० चन्द्रिका प्रसाद सिंह विभाकर ने की । मुख्य अतिथि के रूप में संजय कुमार, अनुमंडल शिक्षा पदाधिकारी, खगड़िया मंचस्थ थे । संचालन कैलाश झा किंकर ने किया ।
पंचम सत्र नाटिकाएँ ‘डॉ० कपिल देव महतो की अध्यक्षता एवं दुर्गेश चन्द्र त्रिनेत्रम के संचालन में सम्पन्न हुआ । मुख्य अतिथि थे डॉ० अनिल पतंग, सम्पादक रंग अभियान (बेगूसराय) आकाश गंगा रंग चौपाल एसोसिएशन बरौनी के कुन्दन कुमार द्वारा निर्देशित लघु नाटिका ‘कुमति नगर का किस्सा’ का मंचन दर्शकों को रोमांचित करने में सफल रहा । दिनकर शर्मा की प्रस्तुति ‘बड़े भाई साहब’ एवं ‘टिकटों का संग्रह’ दर्शक भुला न पाएँगे ।
धन्यवाद ज्ञापन करके डॉ० कपिलदेव महतो ने कार्यक्रम के समापन की घोषणा की ।