आयोजन से पूर्व ही विवादों से घिरता
राष्ट्रमंडल खेल का आयोजन
यूँ तो खेल मनोरंजन और शारीरिक व्यायाम के रूप में विकसित हुआ, लेकिन समय के साथ-साथ प्रतिस्पर्धा, मान-सम्मान और किसी देश की पहचान बनाने तक तथा उसकी शान को बढ़ाने की स्थिति तक पहुँच चुका है । पहले एक कहावत थी -
“पढ़ोगे लिखोगे तो बनोगे नवाब
खेलोगे कूदोगे तो बनोगे खराब”
एक खेल की दुनिया ने वर्तमान में अपनी अहमियत जो साबित की है उसने इस कहावत को उल्टा कर दिया है । आज खेल के मैदान में पैसा, प्रतिष्ठा और ग्लैमर सब कुछ हासिल होता दिखाई दे रहा है । खेल देशों की शान बनता दिखाई दे रहा है । भारत की अपने शान में चार चांद बढ़ाने के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजमानी कर यह मौका बमुश्किल हासिल हुआ है, जिससे दुनिया में इसका सफल आयोजन कर अपनी क्षमता और महत्ता की मिसाल कायम कर सकते हैं ।
लेकिन इस आयोजन के पहले इतनी सारी गड़बड़ियां उजागर होते देख इसकी सफलता में संदेह हो रहा है, साथ ही साथ हम यह भी कह सकते हैं, कि इस तरह की गड़बड़ियां, घोटाले आयोजन से पूर्व विवाद, गड़बड़ियों की जाँच आदि भारत के मूलभूत चरित्र बनते जा रहे हैं, अभी कुछ ही महीने पहले आईपीएल-३ के आयोजन में जिस तरह से वित्तीय अनियमियता खुलकर के सामने आई और आईपीएल-३ के आयोजकों की छीछालेदर होने के बाद पूरे विश्व में खेल प्रेमियों के विश्वास को जिस तरह आघात पहुँचा है, वो निश्चित रूप से भविष्य में भारत में किसी भी बेदाग सफल आयोजन की उम्मीद नहीं करेंगे ।
एक तरफ तो अभी हाल में ओलंपिक जैसे बड़े खेल का सफल आयोजन कर अपनी क्षमता को विश्व में स्थापित कर दिया है । पर उनकी तुलना में अगर भारत की स्थिति देखें तो कॉमनवेल्थ गेम उससे छोटा आयोजन है और उसके आयोजन की तैयारियों में अभी भी अवरोध आ रहे हैं । गुणवत्ता का अभाव और साथ ही साथ नित्य नये वित्तीय अनियमियता का उजागर होना इस बात पर संदेह पैदा करती है, कि एक सफल आयोजन होना आसान है । साथ ही साथ इस खेल की समाप्ति के बाद भी बहुत सारे विवाद उभर कर सामने आयेंगे । इन सब के बावजूद भी हम यही कामना करते हैं कि इन खेलों का आयोजन सफल ढंग से हो भारत इस कॉमनवेल्थ की मेजमानी कर विश्व में अपनी क्षमता का एक अच्छा संदेश उपस्थित कर सके ।
- पं० कृष्णगोपाल मिश्र