एन. टी. पी. सी. एवं पावरग्रीड ने कॉमनवेल्थ गेम्स से खीचे हाथ
सुरेश कलमाडी के नेतृत्व में संकट में घिरे कॉमनवेल्थ गेम्स की मुश्किलें गुरुवार को उस समय और बढ़ गईं जब सरकारी क्षेत्र की दो बिजली कंपनियों एनटीपीसी और पावरग्रिड ने खेलों को दी जाने वाली 40 करोड़ की स्पांसरशिप राशि रोक दी। हांलाकि पहले से ही कई प्राइवेट कंपनियां पहले ही कॉमनवेल्थ गेम्स से अलग रहने का एलान कर चुकी हैं। एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड इंडिया के सेल्स प्रमुख अमिताभ तिवारी का कहना है कि खेलों की मार्केटिंग को ठीक से नहीं संभाला जा रहा है। गोदरेज कंपनी भी कह चुकी है कि वह खेलों से अलग रहेगी।
स्पांसरशिप डील के तहत एनटीपीसी को कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए 50 करोड़ की राशि देनी थी इसमें से 20 करोड़ रुपए फरवरी में ही दिए जा चुके हैं। अब एनटीपीसी का कहना है कि जो रकम उसने दी है वह उसका हिसाब चाहती है और इस काम में किसी केंद्रीय एजेंसी को लगाया जाए। कंपनी के बोर्ड की बुधवार को बैठक हुई जिसमें कॉमनवेल्थ गेम्स की स्पॉन्सरशिप से हाथ खींचने का फैसला हुआ। एनटीपीसी के अध्यक्ष और महानिदेशक आरएस शर्मा ने कहा, हां, हमने आगे स्पांसरशिप बंद कर दी है।
पावरग्रिड भी पीछे हटा : सरकारी क्षेत्र की एक और बिजली कंपनी पावरग्रिड ने भी कॉमनवेल्थ गेम्स की स्पॉन्सरशिप से इनकार किया है। कंपनी के सीएमडी एसके चतुर्वेदी ने कहा, जी, हमने कॉमनवेल्थ गेम्स को पैसा न देने का फैसला किया है।
वहीं सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया खेलों के लिए 50 करोड़ रुपये की राशि पहले ही दे चुकी है। भारतीय रेलवे के बजट में 3 से 14 अक्टूबर तक होने वाले खेलों के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा गया था लेकिन जब से ऑस्ट्रेलिया की कंपनी एसएमएएम को कमीशन दिए जाने की खबरें सामने आई है, भारतीय रेल अपने फैसले पर फिर से विचार कर रहा है।