Untitled Page
Today : 18-05-2012 
samay darpan Narmada Creative Pvt. Ltd.

ग़ज़ल


कितना उपास है ।
सागर की प्यास है ॥


कुछ है बुझा-बुझा,
कुछ तो उदास है ।


अन्दर ज़हर भरा,
लब पर मिठास है ।


संसद की चाबियाँ,
जनता के पास है ।


सरकार है वही,
वह सूरदास है ।


इस इन्क़लाब से,
होना उजास है ।





| More
About us | Advertisement | Contact us | Privacy Policy | Feedback | Admin