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Today : 07-02-2012 
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विकास को तरस रहा वागड तीर्थ ब्रह्‌मा मंदिर


- धर्मेन्द्र उपाध्याय
27 मार्च 2007 का दिन छींचवासियों के लिये तब खास बन गया जब तात्कालिक मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधराराजे सिंधिया ने छींच की भूमि पर कदम रख जगतनियन्ता, सृष्टि रचयिता भगवान ब्रह्‌मा के दर्शन करने के उपरान्त ग्रामवासियों को आश्‍वासन दिया की ईश्‍वरीय कार्य के लिये ईश्‍वर का देश हो चुका है, जिसे पूर्ण करने में सरकार पूरा सहयोग करेगी तथा मात्र आश्‍वासन ही नहीं बल्कि मुख्यमंत्री ने वर्तमान बांसवाडा विधायक तथा तात्कालिक दानपुर विधानसभा के विधायक अर्जुन बामणिया से ब्रह्‌मा मंदिर विकास का प्रारूप निर्मित करने संबंधित चर्चा की तथा ब्रह्‌मा मंदिर विकास समिति के माध्यम से तकमीना बनाकर शीघ्र ही भिजवाने की बात कही जिस पर बामणिया ने मुख्यमंत्री के आगमन से पूर्व कनिष्ठ अभियन्ता बागीदौरा के माध्यम से ब्रह्‌मा मंदिर विकास समिति द्वारा निर्मित तकमीना प्रस्तुत किया जिसके अनुसार पोण्ड रिमोडलिंग स्लुस गेट निर्माण, सी.सी. सड़क चार दिवारी एवं फर्श, प्रोटेक्शन वाल निर्माण, रिटेनिंग वाल एवं घाट निर्माण, प्रोविजन फोर लान, प्रोविजन फोर लाईट्‌स, प्रोविजन फोर चिल्ड्‌न पार्क के लिये ७७.६४ लाख का अनुमानित व्यय था । मुख्यमंत्री ने तकमीना देखने के उपरान्त शीघ्र ही विकास करवाने का विश्‍वास दिलाया । किन्तु नियति को यह मंजूर ही नहीं था की ब्रह्‌मा मंदिर का विकास हो, सरकार बदल गई और प्रस्ताव फाईलों में ही अटक कर रह गये ।

बांसवाडा जिला मुख्यालय से 18 किलोमीटर दूरी पर दक्षिण पश्‍चिम में स्थित ब्रह्‌मपुरी धाम छींच का ब्रह्‌मा मंदिर हमारी प्राचीनतम्‌ उन्‍नत संस्कृति का परिचय देने वाला प्रमुख तीर्थ स्थान है । महामहोपाध्याय रायबहादुर गौरीशंकर हीराचंद ओझा ने बांसवाडा के इतिहास में छींच के ब्रह्‌मा मंदिर का उल्लेख करते हुए लिखा है कि-विकम की बारहवीं शताब्दी के आस-पास का पाषाण निर्मित ब्रह्‌मा मंदिर जिसका विशाल सभा-मंडप, गुम्बद और स्तम्भों पर की बेजोड़ कलाकृतियां उत्कृष्ट कोटि के शिल्प का उदाहरण हैं ।

जनश्रुति के अनुसार इस मंदिर में स्वर्ण निर्मित प्रतिमा थी जिसे हड़पने के प्रयास में विधर्मी आक्रमणकारी छींच तक पहुंच गये किन्तु ये स्वर्ण निर्मित प्रतिमा विधर्मियों के स्पर्श से पूर्व ही अदृश्य होकर भूमि में समा गई । मंदिर के समीप आज जो ब्रह्‌म सरोवर है वह मूर्ति की तलाश के प्रमाण स्वरूप हैं । यह कहा जाता है कि आक्रमणकारी जब स्वर्ण प्रतिमा ढूंढने में असमर्थ रहे तो उन्होंने काले पत्थर से निर्मित ६ फुट की आभामयी प्रतिमा को खंडित कर दिया जो आज भी मंदिर के बाहर शिवलिंग के समीप अपनी दिव्यता और विधर्मियों की क्रूरता की गाथा सुना रही हैं । चतुर्मुखी दिव्य प्रतिमा के खंडित होने के कारण ईसवी सन्‌ 1537 दिनांक 26 अप्रैल, गुरूवार, अनुराधा नक्षत्र के दिन महारावल जगमाल के समय नई प्रतिमा स्थापित की गई । आज भी वही दिव्य आभामयी काले पाषाण की प्रतिमा मंदिर में सुशोभित हो रही है तथा नित्य ही पूजा-अर्चना एवं आरती का क्रम अविरत जारी है । मंदिर के एक स्तम्भ पर ईसवी सन्‌ 1945 का एक लेख है जिसके अनुसार कल्ला के पुत्र देवदत्त ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था । मंदिर के बाहर नौ ग्रहों की प्रतिमा तथा भीतर शेषशायी विष्णु, ब्रह्‌मा एवं महेश्‍वर की प्रतिमायें भी कलात्मक शिल्प के उत्कृष्ट उदाहरण हैं । मंदिर के समीप स्थित ब्रह्‌म सरोवर में भी आस्थावान्‌ नर-नारी आज भी स्नान करके सुख एवं शान्ति का अनुभव करते हैं वहीं श्रावणी कर्म, हिमाद्री स्नान तर्पण आदि शास्त्रोक्‍त कर्मकाण्ड इसी पवित्र सरोवर के पवित्र जल से सम्पन्‍न कराये जाते हैं । ब्रह्‌मा के इस पवित्र जल में स्नान करने में श्रद्धालु अपना अहोभाग्य मनाते हैं ।

विकास हेतु प्रयास-

8 नवंबर 2005 को सहायक आयुक्‍त देवस्थान विभाग, ऋषभदेव द्वारा जब ट्रस्ट मण्डल तीर्थधाम ब्रह्‌माजी मंदिर प्रन्यास को रजिस्टीकृत किया गया तब से नवनिर्वाचित अध्यक्ष परमेश्‍वर पंडया के मार्गदर्शन में मंदिर के अंदर-बाहर रंग रोगन का कार्य आरम्भ हुआ और महज ५ माह के बाद मंदिर का वैभव निखर उठा । मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं ने जब उसके पूरे वैभव को निहारा तो मंदिर विकास की अवधारणा सबके मन में जागृत हो उठी वहीं तात्कालिक विधायक अर्जुन वामणिया ने राज्य की मुख्यमंत्री वसुंधराराजे से व्यक्‍तिगत भेंट करके छींच आने का आमंत्रण दिया तथा ट्रस्ट मंडल को साथ लेकर मंदिर विकास का तकमीना भेंट किया, मुख्यमंत्री के छींच आगमन के बाद तात्कालिक जिलाधीश विकास भाले के मार्गदर्शन में एक्जुकेटिव इंजिनियर वाटर रिसोर्स डिविजन बांसवाडा एवं असिस्टेन्ट इंजिनियर वाटर रिसोर्स गढ़ी ने ब्रह्‌मा कुण्ड समेत मंदिर विकास का नया तकमीना बनाकर मुख्यमंत्री को प्रेषित किया जिसमें अनुमानित व्यय 10871592.00 यानि कुल 108.72 लाख का प्रस्तावित था । स्वयं जिलाधीश भाले एवं आयुक्‍त देवस्थान विभाग ने छींच में ब्रह्‌माधाम के दर्शन किये तो पुरा वैभव की उत्कृष्ट कला को देख अभीभूत हो उठे तथा मंदिर के सौन्दर्यीकरण पर जोर दिया । गांव के लोगों एवं ट्रस्ट मंडल ने वर्तमान स्थानीय विधायक एवं तकनीकी शिक्षामंत्री महेन्द्रजीत सिंह मालविया को भी जनभावना से अवगत कराते हुए छींच ब्रह्‌मा मंदिर सौन्दर्यीकरण हेतु प्रस्ताव प्रेषित किया है तथा शीघ्र ही उनसे भेंट करके वागड़ तीर्थ ब्रह्‌माधाम को श्रेष्ठ पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग करेंगे ।

जलकुम्भी से अटा पडा है ब्रह्‌म सरोवर-

तीर्थ ब्रह्‌माधाम मंदिर के समीप स्थित ब्रह्‌म सरोवर इन दिनों दुर्दशाग्रस्त है, सरोवर के जल में जलकुम्भी एवं गंदगी की भरमार है तथा मंदिर तक पहुंचने के मार्ग में भी गंदगी के ढेर लगे हुए हैं । वागड़ का प्रमुख तीर्थ आज गंदगी मुक्‍त हो कर श्रेष्ठ पर्यटन स्थल के रूप में स्थान पाने को बेताब है तथा बाट जोह रहा है अपने तारणहार की ।



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