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Today : 19-06-2013 
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काश कभी ऐसा होता

- शिखा मेहता

काश कभी ऐसा होता,
दिल मे जिसकी चाह है ।
उससे ये दिल मिल पाता,
काश कभी ऐसा होता ॥


सूरज की किरणों की तरह,
खिल उठती मेरी भी सुबह ।
फूलों की खूशबू की तरह,
महक उठती मेरी जिन्दगी ॥
काश कभी ऐसा होता.............


पक्षियों की तरह मैं भी अपने
पंख फैला पाती खुले आसमान में ।
कोयल की सुरूली राग की तरह,
अपनी भी दिल की बात सुना पाती किसी को ॥
काश कभी ऐसा होता...................


संघर्षरूपी इस दुनिया मे, मैं भी,
अपने पैरों पर खड़ी हो जाती ।
नाम रौशन अपने घर का
मैं भी कभी कर पाती ॥
काश कभी ऐसा होता.............


जीवन खोने का नही पाने का नाम है,
यह मैं भी समझ जाती ।
आत्मनिर्भर, और सदृढ़, ईमानदार बनकर
, जीवन में आगे बढ़ जाती ॥
काश कभी ऐसा होता...............


हर सूरज की किरण एक नया पैगाम,
देती है, यह समझकर जीवन में,
एक कामयाब इंसान बन पाती ।
काश कभी ऐसा होता ...........




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