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आस्था की डुबकी
हिंदुओं के आस्था का सबसे बड़ा मेला कुंभ मेला 2010, 12 साल बाद एक बार फिर से हरिद्वार में 14 जनवरी से आयोजित किया जा रहा है । गंगा नदी के किनारे आयोजित होने वाले इस
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बाहरी हम नहीं वो हैं
एक बार फिर से बाहरी का मुद्दा सामने आया है । इस बार इसमें मायानगरी मुंबई शामिल नहीं है, बल्कि दिलवालों की दिल्ली है । वैसे तो दिल्ली के उपराज्यपाल मजदूरों के लिए पहचान पत्र वाला बयान पहले भी दे चुके हैं.
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भारत उभरती विश्व शक्ति के रूप में
प्राचीन समृद्ध संस्कृति और सभ्यता से खुद को जोड़े रखने वाले विश्व शक्ति के रूप में उभरते भारत की तस्वीर घने कोहरे के बावजूद निकली गणतंत्र दिवस की परेड में साफ नजर आयी ।
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कांग्रेस का नया पैतरा
शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे के हमलों से अविचलित कांग्रेस नेता ने मंगलवार को यहां कहा कि भारत सभी भारतीयों के लिए है। हर देशवासी देश के हिस्से में भी जाकर रह सकता है और किसी भी तरह का भेदभाव पूरी तरह गलत है।
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2009 में पार्टियों की स्थिति
2009 के साल में देश की प्रमुख राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय पार्टियों में कुछ की स्थिति काफी अच्छी तो कुछ की स्थिति काफी खराब हो गई पूरे साल जद तोड़ की राजनीति, एक दूसरे को नीचा दिखाने की राजनीति चलती ही रही, कभी किसी ने किसी को महंगाई, आतंकवाद, असुरक्षा के मुद्दे पर .. आगे..
मायामोह में अमर सिंह
क्या समाजवादी पार्टी के पूर्व महासचिव अमर सिंह उत्तर प्रदेश की मौजूदा मुख्यमंत्री मायावती की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ा रहे हैं? क्या ये कोई नए राजनीतिक समीकरण का संकेत तो नहीं? अमर सिंह के ताज़ा बयान से राजनीतिक हलकों में कुछ ऐसी ही सुगबुगाहट शुरू हो गई है ।..
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अमर ने किया सपा को बॉय बॉय
आखिरकार अमर सिंह ने समाजवादी पार्टी से तौबा कर ही ली । एक लम्बे समय से चले आ रहे खींचतान का अन्त अमर सिंह के सपा छोड़ने से हो गया । समाजवादी पार्टी ने उनके त्यागपत्र देने के बाद नये महासचिव की घोषणा भी कर दी । अब अमर सिंह को सपा से कोई मतलब नहीं रह गया है । .. आगे..
भगवा रोकेगा शिव शेना का शस्त्र
अलग-अलग भाषा और अलग-अलग वेश फिर भी एक देश. हम इसमें विश्वास करते हैं और यही हिंदुस्तान की ताक़त है. मैं नहीं मानता कि राज्य अस्मिता और राष्ट्रीय अस्मिता में कोई विरोध है आगे..
राष्ट्रीय नेतृत्व का संकट
बड़े अफसोस की बात है कि राष्ट्र आज जिस संकट की घड़ी से गुजर रहा है, उसके प्रति न तो राष्ट्र का नेतृत्व, न साहित्यकार, न मीडिया और न ही बुद्धिजीवी संवेदनशील हैं । लगता है सभी संवेदनहीन हो चुके हैं ।. आगे..
सांस्कृतिक पर्यावरण और शिक्षा
शिक्षा मानव को शिक्षित ही नहीं करती, अपितु उसे विचारसंपन्न और सचेतन भी बनाती है । शिक्षा का मुख्य उद्देश्य-
सूचनाओं का संग्रहण ही नहीं, अपितु मनुष्य का सर्वांगीण विकास है ।प्राथमिक स्तर पर बालकों के शैक्षिक विकास का स्वरूप इतना विशाल आकार ले .
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आदमी बन जाओ
भारत माता ने अपने घर में जन-कल्याण का जानदार आँगन बनाया । उसमें शिक्षा की शीतल हवा, स्वास्थ्य का निर्मल नीर, निर्भरता की उर्वर मिट्टी, उन्नति का आकाश, दृढ़ता के पर्वत, आस्था की सलिलता, उदारता का समुद्र तथा आत्मीयता की अग्नि का स्पर्श पाकर जीवन के पौधे.
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राष्ट्रीय पर्व माने ‘हॉली-डे’
26 जनवरी, यानि की हमारे देश भारत का गणतंत्रता दिवस । इसी दिन 1950 में हमारे भारत के लिखे हुए संविधान को लागू किया गया था । हमारा संविधान विश्व का बड़ा लिखा हुआ संविधान है ।
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सूचना
समय दर्पण पत्रिका के माध्यम से वैश्विक स्तर पर अपनी बात रखने का सुनहरा अवसर समय
दर्पण इंटरनेट के इस युग में अपनी बात विश्वस्तर पर पहुँचाने हेतु हिंदी मासिक पत्रिका
व्यक्ति विशेष एवं संस्थाओं से अनुरोध करती है कि वे अपने बारे में विस्तृत जानकारी
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वाह ! जिंदगी |
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